गौरव 
लाइव भारत न्यूज 
नई दिल्ली। 
08 फरवरी 2019
ममता बैनर्जी और बीजेपी की लड़ाई बढ़ती जा रही है.
ममता बनर्जी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री. इस वक्त दो चीजों को रोकने के लिए चर्चा में हैं.
# पहला बीजेपी के नेताओं को.
# दूसरा सीबीआई को.
सीबीआई वाले मामले में तो खूब रायता फैला. सीबीआई कोलकाता पहुंची थी कमिश्नर से पूछताछ करने, खुद धर ली गई. ममता ने केंद्र पर सरकारी एजेंसीज का गलत इस्तेमाल करने का आऱोप लगाया. फिर धरने पर बैठ गईं. धरना खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कमिश्नर को सीबीआई के सामने पेश होने को कहा है. गिरफ्तारी पर रोक लगाई है. ममता इसे लोकतंत्र की जीत बता रही हैं. तो केंद्र सरकार भी इसे लोकतंत्र की जीत बता रही है. माने मैच टाई.
ममता और मोदी की लड़ाई बढ़ती जा रही है.
अब बात करते हैं दूसरे मैच की. जो टेस्ट मैच की तरह खिंचता ही जा रहा है. और ममता दे बाउंसर, दे बाउंसर डाले पड़ी हैं. और इन बाउंसरों का शिकार हैं बीजेपी के नेता. जब भी कोई बीजेपी नेता बंगाल में रैली करने आता है तो कभी रनवे खराब हो जाता है, कभी एयरपोर्ट में काम चल रहा होता है तो कभी बिल्ली रास्ता काट जाती है. दिल पर न लेना, बिल्ली वाली बात फर्जी है. अंधविश्वास है. पर यहां विश्वास ये नहीं होता कि आखिर क्या है कि कथित तौर पर ममता लगातार बीजेपी नेताओं को बंगाल में चॉपर उतारने की परमिशन नहीं दे रही हैं.
ताजा मामला मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का है. उन्हें बंगाल के मिदनापुर में रैली करनी थी. पर उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली. शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर कहा –
ये लोकतंत्र पर हमला है. संविधान हमें इजाजत देता है कि अलग-अलग राजनैतिक दलों के लोग अपनी बात जनता के बीच रखें. आखिर ममता जी किससे डरी हुई हैं? बंगाल सरकार ये क्यों कर रही हैं? मैं भी कल जाने वाला हूं. बहरामपुर में रैली थी, वहां हेलीकॉप्टर उतरने की अनुमति मुझे अभी तक नहीं दी गई है, मैदान की मंजूरी भी नहीं दी गई है. मोदी सरकार की लोकप्रियता से घबरा गई है बंगाल सरकार. वह किसी भी तरह से भाजपा के बढ़ते हुए रथ को रोका जाए, इसका प्रयास हो रहा है.
शिवराज ने ममता को घेरा.
बीजेपी और ममता का ये झगड़ा सबसे पहले गर्माया था 22 जनवरी को. इस तारीख को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मालदा में रैली थी. रैली हुई. पर इससे पहले विवाद भी खूब हुआ.अमित शाह के हेलिकॉप्टर को मालदा में उतरने की जगह नहीं मिलने पर. ये आदेश रैली के चार दिन पहले 18 जनवरी को जारी हुआ. मालदा प्रशासन ने वजह क्या बताई. कहा –
मालदा डिवीजन के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर(पीडब्ल्यूडी सिविल) की रिपोर्ट के मुताबिक मालदा एयरपोर्ट पर अप ग्रेडेशन का काम जोरों पर चल रहा है. भारी मात्रा में मौरंग, डस्ट जैसा सामान रनवे पर पड़ा और फैला हुआ है. टेंपररी हैलिपैड इस काम के कारण ठीक हालत में नहीं है. इस वजह से मालदा एयरपोर्ट हेलिकॉप्टर लैंड करवाने के लिए सुरक्षित नहीं है. इसलिए परमिशन नहीं दी जा सकती.
जवाब सुनने के बाद 18 जनवरी को ही बीजेपी के मालदा के महासचिव गोपाल साहा ने आरोप लगाया कि वहां हर बुधवार को बंगाल सरकार अपना हेलिकॉप्टर उतार रही है. मालदा प्रशासन से पूछा कि जब बंगाल सरकार उस एयरपोर्ट का इस्तेमाल कर रही है तो हमें परमिशन क्यों नहीं.
बीजेपी ने पत्र लिख मांगा था जवाब.
इस सवाल के बाद 21 जनवरी को 11 बजकर 11 मिनट पर एएनआई का ट्वीट आया. ट्वीट ये कि मालदा प्रशासन ने 22 जनवरी को बीजेपी के हेलिकॉप्टर को उतारने की परमिशन दे दी है. जगह दूसरी थी. मालदा एयरपोर्ट की बजाए होटल गोल्डन पार्क के सामने. जहां सीएम का हेलिकॉप्टर भी उतरता है. इसके बाद अमित शाह मालदा की रैली में पहुंचे थे और ममता सरकार पर जमके बरसे थे.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा था कि जिस हेलिपैड पर अमित शाह के हेलिकॉप्टर को उतारने की इजाजत नहीं दी गई है, वहां पर ही ममता बनर्जी और मिथुन चक्रवर्ती के हेलिकॉप्टर उतरे थे. उन्होंने कहा कि बीजेपी ममता सरकार की अलोकतांत्रिक कोशिशों से रुकने वाली नहीं है.
योगी को भी रोका था-
ये मामला ठंडा पड़ा ही था कि 5 फरवरी को फिर कुछ ऐसा ही हुआ. इस बार योगी आदित्यनाथ को चॉपर उतारने की परमिशन नहीं मिली. उन्हें दक्षिण दीनाजपुर के पुरुलिया में जाना था. इस पर योगी झारखंड के बोकारो तक हेलिकॉप्टर से गए. फिर वहां से पुरुलिया के अपने रैली स्थल तक कार से सफर किया.
5 फरवरी को ही बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. उनकी मुर्शिदाबाद में रैली थी मगर उनकी रैली को ही परमिशन नहीं दी गई. इस पर शाहनवाज ने कहा था कि प्रदेश में कानून का शासन नहीं रह गया है. वो मुर्शिदाबाद जाके रहेंगे.
इससे दो दिन पहले 3 फरवरी को भी योगी के साथ ऐसा ही हुआ था. उन्हें तब भी हेलिकॉप्टर उतारने की परमिशन नहीं मिली थी. इसकी वजह से योगी को अपनी दो रैलियों को कैंसल करना पड़ा था. हालांकि योगी ने अपनी एक रैली जोकि बालुरघाट में थी, उसे फोन से ही संबोधित किया. इसमें उन्होंने ममता सरकार को लोकतंत्र और लोग विरोधी बताया था.
योगी ने फोन पर संबोधित की थी रैली.
सब यही करने लगे तो क्या होगा?
ममता बनर्जी के बंगाल में ऐसा लगातार हो रहा है. बीजेपी के नेताओं की रैली के वक्त ही सारी दिक्कतें आ जाती हैं. समझ ये नहीं आता कि जब वो सारे देश के विपक्षी नेताओं को बंगाल बुलाती हैं तब ऐसी दिक्कत क्यों नहीं आती. जब कई प्रदेश से दर्जनों वीआईपी आते हैं तब क्यों नहीं लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ता. क्या सारी दिक्कतें तभी होती हैं जब कोई बीजेपी नेता बंगाल आता है. ममता कब तक प्रशासन पर टोपी करती रहेंगी.
फिर बीजेपी नेता कोई रथयात्रा तो निकाल नहीं रहे कि आपको डर हो कि फलानी जगह से यात्रा गुजरने से टेंशन बढ़ेगी. ये तो सिर्फ जनसभाएं और रैलियां हैं. ऐसे में बार-बार बीजेपी नेताओं को रोका जाना गलत है. अगर देश के हर राज्य में ऐसा ही होने लगे कि विपक्षी नेताओं की रैलियों को परमिशन न मिले. उनके हेलिकॉप्टर न उतरने दिए जाएं तो कैसे चुनाव लड़े जाएंगे. ममता जोकि एकजुट विपक्ष और लोकतंत्र बचाने की दुहाई देती हैं, उनको इस बात का जवाब देना चाहिए कि अगर बीजेपी की जिन 18 राज्यों में सरकार है. वहां बीजेपी ऐसा करने लगे तो उनके एकजुट विपक्ष के नेता रैली कहां करेंगे?

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