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गौरव
लाइव भारत न्यूज़
नई दिल्ली।
14 मार्च 2019
बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से आरजेडी को 20-22 सीटें मिल सकती है. जबकि कांग्रेस के खाते में 10-11 सीटें, आरएलएसपी को 3 से 4, जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा को 1-2 सीटें और वीआईपी को भी 1 से 2 सीटें मिल सकती हैं.
बिहार में महागठबंधन की बीच सीटों के बंटवारे को लेकर आरजेडी के अल्टीमेटम का आखिरी दिन है. कांग्रेस सहित सभी दलों के बीच अभी सीट शेयरिंग की घोषणा नहीं हुई है. हालांकि इन सबके बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तैयार हो चुका है. माना जा रहा है कि आरजेडी और कांग्रेस सहित सहयोगी दलों को एक-एक कदम पीछे खींचने पड़ सकते हैं.
बिहार में महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, आरएलएसपी, हिंदुस्तान अवाम मोर्चा, विकासशील इंसान पार्टी,  लोकतांत्रिक जनता दल और वामपंथी पार्टी शामिल है. सूत्रों की मानें तो बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से आरजेडी को 20-22 सीटें मिल सकती है. जबकि कांग्रेस के खाते में 10-11 सीटें, आरएलएसपी को 3 से 4, जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा को 1-2 सीटें और वीआईपी को भी 1 से 2 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल को एक और लेफ्ट को एक सीट दिए जाने का फॉर्मूला बन रहा है.
दरअसल बिहार में महागठबंधन में कांग्रेस और आरजेडी के बीच ही सीट का पेच फंसा हुआ है. इसी के चलते अभी तक सीटों के बंटवारों की घोषणा नहीं हो सकती है. महागठबंधन में सीटों के लेकर पटना से दिल्ली तक मथापच्ची हो रही है. माना जा रहा है कि दो से तीन दिनों के बीच सीट शेयरिंग की घोषणा की जा सकती है.
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव बिहार के निषाद मतदाताओं को साधने के लिए मुकेश साहनी को अपने साथ रखना चाहते हैं. साहनी की निषाद मतदाताओं के बीच मजबूत आधार को देखते हुए उनकी पार्टी वीआईपी को महागठबंधन का हिस्सा बनाया. मुकेश साहनी बिहार की दरभंगा सीट पर मांग रहे हैं, लेकिन बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले कीर्ति आजाद इसी सीट से सांसद है. ऐसे में कांग्रेस भी इसी सीट पर दावा कर रही है. ऐसे में अब साहनी की पार्टी को इसके बदले मुजफ्फरपुर और खगड़िया देकर साधने की रणनीति है.
जबकि आरजेडी के खाते में 20 से 22 सीटें मिल सकती हैं. इनमें खगड़िया, पाटलिपुत्र, बक्सर, जहानाबाद, गया, मधुबनी, झंझारपुर, वैशाली, सीवान, महाराजगंज, सारण, उजियारपुर और जमुई सीट पर दावा मजबूत माना जा रहा है. इसके अलावा अररिया, मधेपुरा, बांका और भागलपुर की सीटों भी आरजेडी को मिलना तय है, क्योंकि 2014 में इन सीटों पर आरजेडी को जीत मिली थीं.
बिहार में कांग्रेस के खात में मानी जा रही हैं कि कटिहार, सासाराम, समस्तीपुर, औरंगाबाद, किशनगंज, सुपौल, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, शिवहर, हाजीपुर और पटना साहिब सीट मिल सकती हैं. हालांकि मुजफ्फरपुर देकर कांग्रेस दरभंगा सीट मांग रही है. वहीं, एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन में हिस्सा बनने वाले उपेंद्र कुशवाहा के खाते में काराकाट, पूर्वी चंपारण और वाल्मिकीनगर सीट मिल सकती है.
पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हम का बिहार की गया और नालंदा सीट पर दावा मजबूत माना जा रहा है. उनके खाते में ये दोनों सीटें जाने की संभावना बनती दिख रही है. शरद यादव को महागठबंधन मधेपुरा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकता है. इसके अलावा  सीपीआई (एमएल) को आरा लोकसभा सीट मिलने की संभावना है.

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