गौरव
लाइव भारत न्यूज़
नई दिल्ली।
15 मार्च 2019
चंडीगढ़ में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. फिलहाल यहां से भारतीय जनता पार्टी की किरण खेर सांसद हैं. चंडीगढ़ संसदीय सीट को वीआईपी सीट माना जाता है. किरन खेर से पहले यहां से पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बसंल सांसद थे. वो यहां से चार बार चुनाव जीत चुके हैं.
लोकसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछने लगी है. सभी राजनीतिक दल चुनावी मूड में आ गए हैं. इसका असर स्थानीय स्तर पर भी साफ दिख रहा है. सभी राजनीतिक दलों के सांसद और पूर्व सांसद फिर से चुनाव जीतने की तैयारी में जुटे हुए हैं. इसके अलावा कुछ नए प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसी ही चुनावी हलचल शिवालिक की पहाड़ियों में बसे चंडीगढ़ में भी देखने को मिल रही है.
चंडीगढ़ संसदीय सीट को वीआईपी सीट माना जाता है. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी का प्रभाव है. फिलहाल यहां से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की किरण अनुपम खेर सांसद हैं. अभिनेता अनुपम खेर की पत्नी और अभिनेत्री किरण खेर पहली बार सांसद बनी है. उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को हराया था. अब यहां सवाल यह है कि क्या किरन खेर चंडीगढ़ सीट से अपनी जीत को दोहरा पाएंगी.
चंडीगढ़ का राजनीतिक पृष्ठभूमि
चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी का मिलाजुला असर है. यहां की जनता बीजेपी को जिताती है या फिर कांग्रेस को. इस सीट पर पहली बार 1967 में लोकसभा चुनाव हुए थे और बीजेपी के चांद गोयल ने जीत दर्ज की थी. किरण खेर से पहले यहां से पवन कुमार बंसल कांग्रेस के सांसद रहे हैं. इस सीट से पवन कुमार बंसल 4 बार चुनाव जीत चुके हैं, जिसमें से उन्होंने तीन बार लगातार जीत दर्ज की है. बसंल से पहले यहां से बीजेपी के सतपाल जैन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी. फिलहाल चंडीगढ़ में बीजेपी का दबदबा है.
यहां मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भी बीजेपी से हैं. इसके अलावा लोकसभा चुनाव के बाद हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव में भी बीजेपी को यहां भारी जीत मिली. चंडीगढ़ का पूरा प्रशासन डायरेक्ट केंद्र सरकार के हाथ में होता है. पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं, जो केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन करते हैं. फिलहाल बीपी सिंह बदनौर यहां के प्रशासक हैं.
चंडीगढ़ सीट का सामाजिक तानाबाना
चंडीगढ़ शहर को प्राकृतिक सुंदरता का वरदान भी प्राप्त है, जिसके चलते इसको सिटी ब्यूटीफुल भी कहा जाता है. साथ ही यह प्रशासनिक दृष्टि से भी अग्रणी शहर है. यह एक प्लान्ड शहर है, जो पंजाब और हरियाणा दो राज्यों की राजधानी है. यहां पर पंजाब हरियाणा के विधानसभाओं और सचिवालयों के अलावा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट भी हैं. इतिहास और विरासतों से रचा बसा चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है. चंडीगढ़ शहर को फ्रांसीसी मॉडर्निस्ट आर्किटेक्ट ली कार्बूजियर ने डिजाइन किया था. इस शहर में पियरे जिएन्नरेट, मैथ्यु नोविकी और अल्बर्ट मेयर के भी अद्भुत वास्तु नमूने देखे जा सकते हैं.
साल 2014 का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ सीट से भारतीय जनता पार्टी की किरण खेर ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने एक लाख 91 हजार 362 वोट यानी 31 फीसदी वोट हासिल किए थे और कांग्रेस प्रत्याशी पवन कुमार बंसल व आम आदमी पार्टी गुल पनाग को हराया था. किरण खेर से पहले यहां से पवन कुमार बंसल कांग्रेस के सांसद रहे हैं. उन्होंने इस सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी. बसंल से पहले यहां से बीजेपी के सतपाल जैन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी.
पहली बार सांसद बनी किरण खेर का रिपोर्ट कार्ड
चंडीगढ़ लोकसभा सीट से फिलहाल बीजेपी की किरण अनुपम खेर सांसद है. वो पहली बार सांसद बनी है. उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एक लाख 91 हजार 362 वोट हासिल किए थे और 69 हजार 642 वोटों से अपने करीबी प्रतिद्वंदी और कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल को शिकस्त दी थी. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ सीट पर कुल 42 फ़ीसदी मतदान हुआ था, जिसमें से 21 फ़ीसदी वोट किरण खेर के खाते में गए थे.
63 वर्षीय किरण खेर अभिनेत्री के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं. उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में M.A. की डिग्री हासिल की है. संसद सत्र में उनकी उपस्थिति 84 फीस रही है. उन्होंने इस दौरान 330 सवाल पूछे और 38 विषयों पर चर्चा में हिस्सा लिया. वो एक प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश कर चुकी हैं. सांसद निधि से खर्च की जहां तक बात है, तो किरण खेर ने इस निधि से 22 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च किए हैं. यह उनके सांसद निधि का 89.76 फ़ीसदी है. बेंगलुरु में जन्मीं किरण खेर की शादी 26 अगस्त 1985 को अभिनेता अनुपम खेर के साथ हुई.
हाल ही में रिलीज हुई अनुपम खेर की फिल्म दी एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर (The accidental Prime Minister) ने सियासी गलियारे में जबरदस्त हलचल मचाई. जहां एक ओर इस फिल्म के खिलाफ कांग्रेस ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने इस फिल्म का समर्थन किया. इस फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस की बीजेपी ने आलोचना भी की.
आपको बता दें कि अनुपम खेर की इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को एक कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में दर्शाया गया है. अनुपम खेर ने इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का किरदार निभाया है

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