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अयोध्या में मंदिर निर्माण पर मोदी सरकार का बड़ा दांव।
गैर विवादित भूमि पर से स्टे हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी।
गर्भ गृह को छोड़ कर शुरू हो सकता है निर्माण।

सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश के अवकाश पर होने की वजह से भले ही 29 जनवरी को अयोध्या केस की सुनवाई नहीं हो सकी हो, लेकिन राम मंदिर निर्माण को लेकर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि अयोध्या में गैर विवादित 67 एकड़ भूमि पर से स्टे हटा कर असल मालिकों को सौंप दी जाए। अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट वाले फैसले पर सुनवाई करनी है जो 2.77 एकड़ विवादित भूमि से संबंधित है। गैर विवादित भूमि पर सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई विचाराधीन नहीं है और न ही पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड ने गैर विवादित भूमि पर कोई दावा किया है। केन्द्र सरकार की इस अर्जी को राममंदिर निर्माण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कहा चुका है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही। उनके लिए अयोध्या का मामला एक सिविल मुकदमा है जो 2.77 एकड़ विवादित भूमि से संबंधित है।

हालांकि इस सिविल मुकदमे की सुनवाई के लिए भी चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने स्वयं की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पीठ का गठन कर रखा है। 29 जनवरी को केन्द्र सरकार ने जिस महत्वपूर्ण बिंदू पर अर्जी दायर की है उससे प्रतीत होता है कि अयोध्या में गर्भगृह को छोड़ कर मंदिर का निर्माण शुरू हो सकता है। असल में वर्ष 1993 में केन्द्र सरकार ने ही 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। बाद में कोर्ट ने अधिग्रहित भूमि पर यथा स्थिति लागू कर दी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया उसमें 2.77 एकड़ भूमि को विवादित मानते हुए तीन हिस्सों में बांटने का निर्णय दिया। एक हिस्सा र्निमोही अखाड़े को दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा रामलला को। 67 एकड अधिग्रहित भूमि में से 45 एकड़ भूमि रामजन्म भूमि न्यास की है तथा बीस एकड़ भूमि मानस ट्रस्ट व अन्य मंदिरों की है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट में गैर विवादित भूमि का मामला विचाराधीन नहीं है इसलिए माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार की अर्जी के बाद 67 एकड़ भूमि पर से स्टे हट सकता है। यदि ऐसा होता है तो अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद की पहल पर भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो सकता है। अभी अयोध्या में जो नक्काशी करे हुए शिलाखंड पड़े हैं वे भी अधिग्रहित भूमि पर हैं। विहिप ने मंदिर निर्माण की जो योजना बनाई है उसमें गर्भगृह यानि भगवान राम के जन्म स्थल के अलावा अनेक छोटे मंदिरों का निर्माण भी होना है। प्रवचन स्थल, यज्ञ शाला आदि भी बननी हैं। ऐसे में गर्भगृह को छोड़ कर मंदिर का निर्माण शुरू हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार की अर्जी दाखिल होने पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा है कि यदि गैर विवादित भूमि पर से स्टे हट जाएगा, तो मंदिर का निर्माण जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। केन्द्र सरकार की अर्जी पर विहिप ने भी खुशी जाहिर की है। कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी गैर विवादित भूमि पर निर्माण होने पर सहमति जताई है।

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